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Thursday, July 19, 2012

‎*** बहुराष्ट्रीय कंपनियां देश में बेरोजगारी का कारण

देश में जितना भी रोजगार है 80% लघु उद्योगों में है। लघु उद्योगों में रोजगार प्राप्त व्यक्तियों की संख्या 1986-87 में 10.1 करोड़ थी जो 1987-88 में 10.7 करोड़ हो गयी। 2008 तक भारत में कुल लघु उद्योगों और गृह उद्योगों की संख्या 5.8 करोड़ थी। इसमें से 6,40,000 लघु ईकाईयाँ इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लघु उद्योग में बनने वाले हर सामान में घुसपैठ के चलते बीमार हो गयी और देश में प्रतिवर्ष "1 करोड़ 84 लाख" बेरोजगार पैदा हो जाते हैं। इनमे से अधिकांश छोटी ईकाईयाँ बंद होने की वजह से बेरोजगार हो जाते हैं। इन विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने विकास के नाम पर सैकड़ों वर्षों से चल रहे हमारे देशी कारोबार, हुनर, हस्तशिल्प को रौंदा है जिससे करोड़ों लोगों की रोजी रोटी छीन गयी है। आधुनिकरण की सबसे ज्यादा मार पड़ी है कारीगरों, दस्तकारी व कुटीर उद्योगों पर।

जूता उद्योग का आधुनिकरण होगा तो कौन मारा जाएगा ? मोची
कपड़ा उद्योग का आधुनिकरण होगा तो कौन बर्बाद होगा ? बुनकर
वस्त्र उद्योग का रेडिमेडीकरण होगा तो कौन नष्ट होगा ? दर्जी
मिठाई बनाने के क्षेत्र में जब विदेशी कंपनियां घुसेंगी तो कौन हैरान होगा ?हलवाई
कुल्हड़ की जगह विदेशी कंपनियां प्लास्टिक के गिलास बनाने लगेंगी तो कौन मारा जाएगा ? कुम्हार
फलों का रस, ठंडा पेय आदि डिब्बा बंद करके बेचने के लिए विदेशी कंपनियां आएँगी तो कौन समाप्त होगा ? फलों का रस बेचने वाले
पानी बेचने के लिए भी विदेशी कंपनियां आएँगी तो आगे कहा नहीं जा सकता, स्वयं सोच लें।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2008 के अंत तक देश में बेरोजगारों की संख्या
"20 करोड़" है। यह संख्या उनकी है जिन्होने अपना पंजीकरण सरकारी कार्यालयों में करवा रखा है। इसके अलावा करोड़ों लोग ऐसे हैं जो इस तरह का पंजीकरण नहीं करवाते हैं। इस तरह कुल मिलकर अनुमानित बेरोजगारों की संख्या "40 करोड़" से अधिक है।

1. Adidas, Puma, Nike, Duke, Lotto, Wrangler, Lee, Denim आदि विदेशी कंपनियों के भारत में सिले हुए कपड़ों के क्षेत्र में घुस जाने से देश भर के लाखों दर्जियों की आजीविका छिन रही है क्योंकि भारत तेज़ी से सिले हुए कपड़ों का बाज़ार बन रहा है।
2. Adidas, Puma, Lotto के भारत में खेल का सामान बनाने वाले क्षेत्र में घुस जाने से जालंधर के खेल सामान उत्पादन के लघु उद्योग में लगे हुए 60 हज़ार कुशल कारीगरों के अस्तित्व को खतरा है। इसके अलावा यूपी, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, महाराष्ट्र तथा दिल्ली में लगे हुए लगभग 1 लाख 80 हज़ार अन्य कुशल श्रमिकों का रोजगार भी खतरे में है।
3. Britania के चलते उ॰प्र॰, बिहार व म॰प्र॰ के बेकरी उद्योग में लगे 1 लाख 22 हज़ार से भी अधिक श्रमिकों की रोजी रोटी चौपट हने की कगार पर है।
4. Bata, Reebok, Adidas, Nike, Puma, Woodland, Bugati व अन्य विदेशी कंपनियों के जूतों के चलने से देश के लाखों मोचियों को बर्बाद किया है।
5. Wimco, AIM, Mangaldeep(ITC) ने बरेली व शिवाकाशी के माचिश उद्योग में लगे हजारों श्रमिकों को चौपट कर दिया है।
6. Pepsi, Cola के कारण देश की लगभग 2525 चोटी ईकाईयां बंद हो गयी और लगभग 3 लाख 75 हज़ार कुशल कारीगर श्रमिक अपनी आजीविका के लिए दर दर भटक रहे हैं।

सोचिए जरा !!

स्वदेशी अपनाओ, देश बचाओ !! स्वदेशी अपनाओ, देश बचाओ !!
स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ

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