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Saturday, October 20, 2012

जय जय श्री शनिदेव

जय जय श्री शनिदेव
.शनि शिंगणापुर
.नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌।
.छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामी शनैश्चरम्‌॥

शनि साढे साती, ढैय्या एवं अशुभ शनि
1. शनि साढे साती, ढैय्या एवं अशुभ शनि पाया की शांति के लिए शनि के बीज मंत्र या वैदिक पौराणिक मंत्र का जप करना चाहिये।
2. शनि के दान में देने योग्य वस्तुएं : लोहा, अंगीठी, तवा, चिम्मटा, सरसों का तेल, काले तिल, काला कम्बल, काले जूते, काली जुराबे, काली भैंस या काली गाय अपनी काले उडद, सामथ्र्य के अनुसार दान दें।
3. प्रत्येक शनिवार को बन्दरों को गुड, चना या केले आदि खिलाये।
4. शनिवार को काले कुत्ते को तेल से चुपडी रोटी डालें।
5. काले उडद के लड्डू तिल के तेल में बनाकर कौओं को डालें।
6. सात शनिवार शनि के दिन से या शनि के नक्षत्र से आरम्भ कर काली भैंस को काले चने खिलाये।
7. सात शनिवार काले उडद के आटे की गोलिया बनाकर मछलियों को डाले।
8. 11 शनिवार काले कोयले लंगर में (जहाँ लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है) भोजन पकाने के लिये सामथ्र्य के अनुसार दान दें।
9. घोडे की नाल का छल्ला बिना टांके के ही मçन्त्रत कर मध्यमा अंगुली में शुक्ल पक्ष में शनिवार के दिन धारण करने से शनि के प्रकोप में कमी आती है।
10. भगवान शिव या हनुमान की विधि पूर्वक पूजा करें। प्रतिदिन शिव सहस्त्र नाम या हनुमान चालीसा या हनुमान के 108 नामों का स्मरण करें
जय जय श्री शनिदेव

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