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Friday, January 10, 2014

चरित्र और ज्ञान

एक राजपुरोहित अनेक विद्याओ के ज्ञाता होने के कारण राज्य में बहुत प्रतिष्ठित थे | बड़े बड़े विद्वान् और स्वयं राज्य के राजा भी राजदरबार में राजपुरोहित के आते ही उठकर उन्हें आसन प्रदान करते थे |
एक बार राजपुरोहित के मन में जिज्ञासा हुई ..इतना सम्मान उन्हें अपने ज्ञान के कारण मिलता है या ..अपने शुद्धः चरित्र के कारण....?
एक दिन राजदरबार से लौटते समय राजपुरोहित राजा का खजाना देखने गए और उस खजाने से राजपुरोहित ने पांच बहुमूल्य मोती उठा लिए ....राजपुरोहित के इस कार्य को देखकर उस खजाने के खंजाची जो उस समय वही था को बहुत आश्चर्य हुआ |
दूसरे दिन भी राजपुरोहित ने राजदरबार से लौटते समय राजा के खजाने से पाच बहुमूल्य मोती फिर उठा लिए यह देखकर ..खंजाची के मन में जो सम्मान का भाव था राजपुरोहित के प्रति वोह क्षीण हो गया|
तीसरे दिन भी राजपुरोहित ने राजदरबार से लौटे समय खजाने से पाच बहुमूल्य मोती फिर उठा लिए ...अब तो खंजाची का धैर्य जवाब दे गया उसने इस बात कि जानकारी राजा को दे दी ....राजा को भी राजपुरोहित के इस कार्य से बड़ा आघात लगा और राजा के नज़रो में राजपुरोहित कि जो प्रतिष्ठा थी बिखर गयी|
चौथे दिन जब राजपुरोहित राजदरबार में आये तो राजा ने उठकर ना उन्हें अभिवादन किया और ना आसन प्रदान किया |राजपुरोहित समाजः गयी कि राजा को सब ज्ञात हो चूका है ....राजसभा कि समाप्ति के बाद राजा ने सभी सभा सड़ो के जाने के बाद एकांत में राजपुरोहित से पूछा क्या आपने हमारे खजाने से बहुमूल्य मोती उठाये है ?..राजपुरोहित ने स्वीकार किया ..जी महाराज मैंने पंद्रह बहुमूल्य मोती खजाने से उठाये है ...यह सुनकर राजा को बहुत क्रोध आया ..दुःख और आश्चर्य के साथ राजा ने कहा ...आपने ऐसा कार्य करके अपने जीवन भर कि प्रतिष्ठा खो दी ....आपने ऐसा क्यों किया ?
राजपुरोहित ने मुस्कुराकर और शांति के साथ ये जवाब दिया ...राजन.|केवल इस बात कि परीक्षा लेने हेतु कि ज्ञान और चरित्र में से कौन बड़ा है ..मैंने आपके खजाने से बहुमूल्य मोती उठाये थे .....आज ज्ञात हुआ ..मेरा सम्मान ज्ञान से ज्यादा चरित्र के कारण है ...आज चरित्र के प्रति मेरी आस्था और बढ़ गयी है.यह सुनकर राजा का क्रोध शांत हो गया |
प्रिय मित्रों ...यदि हम डॉक्टर है .. इंजीनीअर है..किसी अच्छे पद पर प्रतिष्ठित है ..या सफल व्यवसायी है ...ये बात बहुत अच्छी है ..पर यदि हमारा चरित्र भी उत्तम है ..तो सोने पर सुहागे वाली बात है |
फ्रेंड्स हमारा चरित्र कुछ गुणो से मिलकर बनता है जैसे :-
हम बहुत सकारात्मक सोच के धनि है (हर विपरीत परिस्थिति में )
ईमानदारी(रिश्तो और अपने कार्य क्षेत्र के प्रति )या लॉयल्टी कह सकते है
सत्यता और वचन बद्धता ...उत्तम व्यवहार ...और हेल्पिंग नेचर ..(उस समय जब कोई व्यक्ति विपरीत परिस्थितियो में घिरा हो)
साहस ..धैर्य ...नारी के प्रति सम्मान .. परिश्रमिता ..आदि और भी
हमारे चरित्र में कोई भी उपरोक्त एक गुण भी शुद्धः रूप में होना चाहिए ...जैसे यदि हम ईमानदार या लोयल है तो हर क्षेत्र में रहिये ..रिश्तो में ..अपने कार्य क्षेत्र में और हर परिस्थिति में ईमानदार होना चाहिए यही चरित्र कि शुद्धता है |
कोई भी एक गुण यदि हम में शुद्ध रूप में है तो बाकी सभी गुण हममे खुद -बा -खुद ..आ जाते है
ज्योतिषीय दृष्टि से देखे तो इन् गुणो को धारण करने पर सभी ग्रह खुद -बा-खुद ठीक हो जाते है
जैसे हम वचन बद्धः है तो सूर्य ..ठीक होता है 
साहसी और उदार है ..तो मंगल 
मधुर वाणी और व्यवहार के धनि है तो .चन्द्र और बुध 
नारी के .और बड़ो या अपने से श्रेष्ठ के प्रति सम्मान कि भावना है तो ....शुक्र और गुरु ठीक होते है
परिश्रमी और निर्व्यसनी है..तो शनि खुद-बा -खुद ठीक हो जाता है
तो इस प्रकार अच्छा चरित्र ही हमारे सुख और समृद्धि का रहस्य है
साभार :मुझे ये कहानी अच्छी लगी 

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