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Saturday, December 3, 2016

चर्म रोग के लक्षण-



इस रोग से पीड़ित रोगी की त्वचा पर सूजन हो जाती है तथा उसके फोड़े-फुंसियां निकलने लगता है। रोगी व्यक्ति को खुजली तथा दाद हो जाता है और उसके शरीर पर छोटे-छोटे लाल या पीले दाने निकल आते हैं।

♈चर्म रोग होने का कारण:-

♊चर्म रोग होने का सबसे प्रमुख कारण शरीर में दूषित द्रव्य का जमा हो जाना होता है।
♑चर्म रोग कभी भी स्थानीय नहीं होते हैं बल्कि अन्य रोगों की तरह ही यह शरीर के अन्दर खराबी और गंदगी के कारण होते हैं।
🅰चर्म रोग भूख से अधिक भोजन करने, संतुलित भोजन न करने, उचित तथा नियमित व्यायाम न करने, आराम न करने, अच्छी तरह से नींद न लेने के कारण होता है।
💲चाय-कॉफी तथा नशीली वस्तुओं का अधिक सेवन करने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
♓दूषित भोजन का सेवन करने के कारण भी चर्म रोग हो जाते हैं।
♈कब्ज, सिर में दर्द, पेचिश आदि अन्य रोगों के कारण भी चर्म रोग हो सकते हैं।
अधिक गर्म तथा ठंडे मौसम के कारण भी चर्म रोग हो जाते हैं।
♊पाचन क्रिया तथा यकृत में खराबी आ जाने के कारण चर्म रोग हो जाते हैं।
जिस व्यक्ति के पेट में कीड़ें होते हैं उसे भी चर्म रोग हो जाते हैं।
♑शरीर की अच्छी तरह से सफाई न करने के कारण भी चर्म रोग हो जाते हैं।
H गीले वस्त्र तथा अधिक गर्म वस्त्र पहनने के कारण भी चर्म रोग हो जाते हैं।
मानसिक तनाव चिंता के कारण भी चर्म रोग हो सकते हैं।
A रोगी व्यक्ति के वस्त्रों को पहनने तथा उसके द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों का उपयोग करने से भी चर्म रोग हो जाते हैं।
⚫चर्म रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

P इस रोग से पीड़ित रोगी को कम से कम 7 दिनों तक गाजर, ककड़ी, पालक, गाजर, पत्तागोभी, सफेद पेठा आदि फलों का रस पीना चाहिए और उपवास रखना चाहिए। फिर कुछ दिनों तक बिना पका हुआ भोजन जैसे-सलाद, अंकुरित खाद्य-पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
P करेले के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से कुछ ही दिनों में चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।
Y मेथीदाना को पानी में कम से कम 10 घण्टे तक भिगोकर रख लें। इस पानी को सुबह के समय में प्रतिदिन पीने से कुछ ही दिनों में चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।
प्रतिदिन सुबह के समय में तुलसी की पत्तियां तथा अंजीर खाने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।
B नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी से स्नान करें तथा नीम के पानी से एनिमा क्रिया करें। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।
I चर्म रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कुंजल तथा शंख प्रक्षालन क्रिया करनी चाहिए। इसके साथ-साथ कुछ आसन तथा यौगिक क्रिया करने से भी रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
R इस रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के आसन तथा यौगिक क्रियाएं हैं जिन्हें प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के साथ-साथ करने से चर्म रोग जल्दी ही ठीक हो जाते हैं। ये आसन तथा यौगिक क्रियाएं इस प्रकार हैं- सर्वांगासन, मत्स्यासन, सूर्य नमस्कार, योगनिद्रा, पश्चिमोत्तानासन, जालंधर, उडि्डयान बंध, शीतली, कपालभाति तथा नाड़ीशोधन, भस्त्रिका आदि।
T प्रतिदिन सूर्य तप्त हरी बोतल का पानी पीने तथा उसका तेल त्वचा पर लगाने से चर्म रोग जल्दी ही ठीक हो जाते हैं।
H यदि रोगी व्यक्ति खाज पर तुलसी का रस या फिर नींबू का रस लगाए तो उसे बहुत अधिक लाभ मिलता है जिसके फलस्वरूप खाज ठीक हो जाती है।
D नींबू के रस को नारियल के तेल में मिलाकर प्रतिदिन त्वचा पर लगाने से कई प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।
A नारियल के तेल में कपूर मिलाकर दाद या खाज पर लगाने से लाभ होता है।
दाद तथा खाज पर पुदीने का रस लगाने से ये जल्दी ही ठीक हो जाते हैं।
Y दाद पर गर्म ठंडा सेंक करके मिट्टी की पट्टी लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
मस्से पर कच्चा आलू या कच्चा प्याज काटकर 2 सप्ताह तक दिन में 4 बार लगाने से लाभ होता है।
🅰यदि किसी व्यक्ति को फोड़ा हो गया है तो उस पर पान का पत्ता गर्म करके या फिर अरन्डी का तेल लगाकर रात भर किसी पट्टी से बांध लें। इससे फोड़ा जल्दी पककर फूट जाएगा तथा उसके अन्दर की मवाद बाहर आ जाएगी और कुछ ही दिनों में फोड़ा ठीक हो जाएगा।
फोड़े पर हल्दी का लेप लगाने या फिर नमक मिले पानी से फोडे़ को धोने से फोड़ा पककर फूट जाता है और जल्दी ही ठीक हो जाता है।
💲फोड़े के ऊपर बर्फ बांधने से फोड़े का दर्द तथा सूजन कम हो जाती है। फोड़े की सिंकाई करके उस पर मिट्टी लेप करने से भी दर्द में आराम मिलता है।
♓यदि चेहरे पर किसी प्रकार के फोड़े या फुंसियां हैं तो तुलसी की कुछ पत्तियों को पानी में उबालकर इस पानी से चेहरे को धोएं। इस क्रिया को दिन में कम से कम 3 बार करने से चेहरे के फोड़े-फुंसिया ठीक हो जाती हैं।
♈2 बड़े चम्मच अजवायन को पीसकर चूर्ण बना लें और फिर इसे दही में मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को सोते समय चेहरे पर लगा लें और सुबह के समय में गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें, इससे चेहरे के फोड़े-फुंसियां तथा मुहांसे ठीक हो जाते हैं।
♊इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को तेल, खटाई, मसालेदार, नशीली चीजों आदि अम्लकारक खाद्य-पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे चर्म रोग और बढ़ने लगते हैं।
♑चर्म रोग से पीड़ित रोगी को धूप में बैठकर अपने शरीर पर शुद्ध सरसों के तेल की मालिश करनी चाहिए और उसके बाद रगड़-रगड़ कर ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
💐चर्म रोग के होने का सबसे प्रमुख कारण पेट के रोग है इसलिए इस रोग का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को सादा और बिना चिकनाई वाले भोजन का सेवन करना चाहिए। इसके बाद चेहरे के मुंहासों का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करना चाहिए।
🌷चोकर सहित आटे की रोटी, दही और मठ्ठे आदि का सेवन करने से चर्म रोग से पीड़ित व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
🌹चर्म रोग से पीड़ित रोगी को कुछ दिनों तक प्रतिदिन 1-2 बार पेड़ू पर गीली मिट्टी की पट्टी का आधे-आधे घण्टे तक लेप करना चाहिए। यदि रोगी को कब्ज हो तो कब्ज को दूर करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा से इलाज करना चाहिए तथा 24 घण्टे में एक बार एनिमा लेना चाहिए।
🌸किसी चौड़े मुंह वाले बर्तन में पानी भरकर, इसे आग पर उबलने के लिए रख दें। जब भाप निकलने लगे तो आग से बर्तन को उतार लें और लगभग 15 मिनट तक चेहरे पर भाप लें। इसके बाद मुलायम तौलिया से चेहरे को धीरे-धीरे रगड़कर साफ कर लें। इसके बाद ठंडे पानी से चेहरे को धो ले। इस प्रकार की क्रिया प्रतिदिन करने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं।
संतरे का छिलका पानी में पीसकर दिन में 3 बार चेहरे पर मलने से चेहरा साफ हो जाता है।
🌺दही में काली चिकनी मिट्टी को मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को रात के समय में चेहरे पर लगाकर सो जाएं। फिर इसके बाद सुबह के समय में उठकर चेहरे को धो ले। इस प्रकार से यह क्रिया कुछ दिनों तक करने से चर्म रोग जल्दी ठीक हो जाते हैं।
🍄चर्म रोग से पीड़ित रोगी को आसमानी रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल 20 मिलीलीटर की प्रति मात्रा में प्रतिदिन 6 से 7 बार पीने तथा शरीर के रोगग्रस्त भाग पर हरे रंग का प्रकाश दिन में 25 मिनट तक डालने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
➡जानकारी-

 रोग से पीड़ित रोगी को अपने भोजन में नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
 रोग से पीड़ित रोगी को चीनी, रिफाइण्ड में बने खाद्य पदार्थ, चाय, कॉफी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
 रोग से पीड़ित रोगी को एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसका मूत्र साफ होता रहे, त्वचा से पसीना निकलता रहे, फेफड़े ठीक काम करते रहें और पेट में कब्ज न होने पाए.

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