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Tuesday, September 25, 2018

एक ही बेटा

एक सम्राट का एक ही बेटा था।*
*वह बेटा मरण—शय्या पर पड़ा था।*
*चिकित्सकों ने कह दिया हार कर कि हम कुछ कर न सकेंगे,*
*बचेगा नहीं, बचना असंभव है।*
*बीमारी ऐसी थी कि कोई इलाज नहीं था।*
*दिन दो दिन की बात थी, कभी भी मर जाएगा।*
*तो बाप रात भर जाग कर बैठा रहा।*
*विदा देने की बात ही थी।*
*आंख से आंसू बहते रहे, बैठा रहा।*
*कोई तीन बजे करीब रात को झपकी लग गई बाप को बैठे—बैठे ही।*
*झपकी लगी तो एक सपना देखा कि एक बहुत बड़ा साम्राज्य है,*
*जिसका वह मालिक है।*
*उसके बारह बेटे हैं—बड़े सुंदर, युवा, कुशल, बुद्धिमान, महारथी, योद्धा!*
*उन जैसा कोई व्यक्ति नहीं संसार में।*
*खूब धन का अंबार है! कोई सीमा नहीं! वह चक्रवर्ती है।*
*सारे जगत पर उसका साम्राज्य है!*
*ऐसा सपना देखता था, तभी बेटा मर गया।*
*पत्नी दहाड़ मार कर रो उठी।*
*उसकी आंख खुली। चौंका एकदम।*
*किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया।*
*क्योंकि अभी—अभी एक दूसरा राज्य था,*
*बारह बेटे थे, बड़ा धन था—वह सब चला गया;*
*और इधर यह बेटा मर गया!*
*लेकिन वह ठगा—सा रह गया।*
*उसकी पत्नी ने समझा कि कहीं* *दिमाग तो खराब नहीं हो गया,*
*क्योंकि बेटे से उसका बड़ा लगाव था।*
*एक आंसू नहीं आ रहा आंख में।*
*बेटा जिंदा था तो रोता था उसके लिए,*
*अब बेटा मर गया तो रो नहीं रहा बाप।*
*पत्नी ने उसे हिलाया और कहा,* *तुम्हें कुछ हो तो नहीं गया?*
*रोते क्यों नहीं?*
*उसने कहा, 'किस—किस के लिए रोऊं?*
*बारह अभी थे, वे मर गए।*
*बड़ा साम्राज्य था, वह चला गया।*
*उनके लिए रोऊं कि इसके लिए रोऊं?*
*अब मैं सोच रहा हूं कि किस—किस के लिए रोऊं।*
*जैसे बारह गए, वैसे तेरह गए।*
*बात समाप्त हो गई, उसने कहा।*
*वह भी एक सपना था, यह भी एक सपना है।*
*क्योंकि जब उस सपने को देख रहा था*
*तो इस बेटे को बिलकुल भूल गया था।*
*ये राज्य, तुम सबको भूल गया था।*
*अब वह सपना टूट गया तो तुम* *याद आ गए हो।*
*आज रात फिर सो जाऊंगा, फिर* *तुम भूल जाओगे।*
*तो जो आता—जाता है, अभी है* *अभी नहीं, अब दोनों ही गए।*
*अब मैं सपने से जागा।*
*अब किसी सपने में न रहूंगा।*
*हो गया बहुत, समय आ गया।*
*फल पक गया, गिरने का वक्त है!*



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